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कानपुर में विकास की दोहरी सौगात: सांसद रमेश अवस्थी के प्रयासों से जलमार्ग विस्तार की मांग के साथ 14 नालों के टैपिंग को मिली ₹138.11 करोड़ की स्वीकृति

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कानपुर। कानपुर के लोकप्रिय सांसद रमेश अवस्थी के निरंतर प्रयासों से कानपुर शहर को विकास की दो और बड़ी उपलब्धियां मिली हैं, जो न केवल औद्योगिक और आर्थिक प्रगति को गति देंगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी। एक ओर जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (एनडब्ल्यू-1) को वाराणसी से कानपुर तक विस्तारित करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर शहर के 14 प्रमुख नालों को टैप करने की परियोजना को ₹138.11 करोड़ की लागत से स्वीकृति मिल गई है। यह स्वीकृति गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के राष्ट्रीय अभियान 'नमामि गंगे' को मजबूती प्रदान करेगी और कानपुरवासियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सांसद रमेश अवस्थी ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर और जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाकात कर एनडब्ल्यू-1 को कानपुर तक विस्तारित करने की मांग की थी। यह परियोजना विधानसभा चुनाव से पहले पूरी होने की उम्मीद के साथ रखी गई है, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव में 'स्वावलंबी भारत' और 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के संकल्प को बल मिले। वर्तमान में यह जलमार्ग वाराणसी से कोलकाता तक संचालित है, लेकिन कानपुर तक लगभग 200 किलोमीटर के अतिरिक्त विस्तार से कानपुर, लखनऊ, आगरा, उन्नाव, मुरादाबाद, फिरोजाबाद और कन्नौज जैसे शहरों के कार्गो को आसान और सस्ता परिवहन मिलेगा।

इससे कानपुर के चमड़ा उद्योग (6,000 करोड़ वार्षिक निर्यात), वस्त्र निर्माण (200 करोड़ कारोबार), 16,675 से अधिक इंजीनियरिंग इकाइयों और कन्नौज के इत्र-अत्तर निर्यात को नई गति मिलेगी। क्षेत्रीय जीडीपी में करीब 4,000 करोड़ की वृद्धि का अनुमान है। सीधे 8,360 से 10,480 रोजगार सृजित होंगे, जबकि अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। घाटमपुर (1,980 मेगावाट) और पनकी तापीय संयंत्रों को 4 मिलियन टन कोयला जलमार्ग से 40% सस्ता मिलेगा, जिससे बिजली उत्पादन लागत कम होगी। पर्यावरणीय लाभ के रूप में प्रतिवर्ष 2-3 लाख टन CO2 की बचत होगी और चमड़ा उद्योग का प्रदूषण नियंत्रित होगा।

दूसरी बड़ी उपलब्धि के रूप में, सांसद अवस्थी के प्रयासों से शहर के 14 प्रमुख नालों को टैप करने की परियोजना को केंद्र से ₹138.11 करोड़ की स्वीकृति मिल गई है। इस कदम से इन नालों का गंदा पानी सीधे गंगा या अन्य नदियों में नहीं गिरेगा, बल्कि उसे ट्रीटमेंट प्लांट्स की ओर मोड़ा जाएगा। इससे नदियों में प्रदूषण की मात्रा काफी कम होगी, जल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान को मजबूती मिलेगी।

यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा प्रयास है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में नालों से निकलने वाला अपशिष्ट लंबे समय से प्रदूषण का प्रमुख स्रोत रहा है। टैपिंग के बाद अपशिष्ट जल का उचित प्रबंधन संभव होगा, जिससे नदी की जैव विविधता बचेगी और शहर की सुंदरता बढ़ेगी।

सांसद रमेश अवस्थी के इन प्रयासों से कानपुर में विकास की नई लहर आई है। जलमार्ग विस्तार से आर्थिक मजबूती और नालों टैपिंग से पर्यावरण संरक्षण दोनों परियोजनाएं शहर को आधुनिक और स्वच्छ बनाने में मील का पत्थर साबित होंगी। कानपुरवासी इन उपलब्धियों के लिए सांसद का आभार व्यक्त कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि शीघ्र ही इन परियोजनाओं का कार्य शुरू हो जाएगा।

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